लव मैरिज वाला दामाद – एक अनकही यात्रा
लव मैरिज वाला दामाद – एक अनकही यात्रा "जब प्यार करना भी एक अपराध बन जाता है..." प्रस्तावना: निमंत्रण का फर्क कार्ड पर लिखा था - "सादर निमंत्रण"। लेकिन कहीं नहीं लिखा था कि यह निमंत्रण केवल अरेंज मैरिज वाले दामादों के लिए है। सरिका की बहन की शादी थी। बुलावा सिर्फ सरिका को मिला था, पर चूंकि उसे गाड़ी चलानी नहीं आती, तो मुझे भी चलना पड़ा। अगर पता होता कि मैं सिर्फ ड्राइवर की हैसियत से जा रहा हूं, तो uniform पहनकर जाता! पहला पड़ाव: पार्किंग की राजनीति हॉल पहुंचे तो पार्किंग अटेंडेंट गायब। किसी पास के घर वाले बोले - "यहीं खड़ी कर दीजिए।" धन्यवाद देकर गाड़ी लगाई। उस वक्त नहीं पता था कि यही सबसे VIP ट्रीटमेंट होगा जो मुझे मिलने वाला था। थोड़ी देर में कुछ साली लोग आईं - अपनी बहन को लेने। सरिका के कहने पर मैं कुली बनकर बैग लेकर लड़की वालों के घर तक गया। वैसे, मुफ्त की कुली सेवा भी कोई बुरी बात नहीं है! दूसरा चैप्टर: दामादों का वर्गीकरण घर पहुंचते ही निर्देश मिला - "बैग अंदर रखिए, बाहर हॉल में बैठिए।" बाहर गया तो एक अद्भुत नजारा था। दो-तीन अरेंज मैरि...