लव मैरिज वाला दामाद – एक अनकही यात्रा
लव मैरिज वाला दामाद – एक अनकही यात्रा
"जब प्यार करना भी एक अपराध बन जाता है..."
प्रस्तावना: निमंत्रण का फर्क
कार्ड पर लिखा था - "सादर निमंत्रण"। लेकिन कहीं नहीं लिखा था कि यह निमंत्रण केवल अरेंज मैरिज वाले दामादों के लिए है।
सरिका की बहन की शादी थी। बुलावा सिर्फ सरिका को मिला था, पर चूंकि उसे गाड़ी चलानी नहीं आती, तो मुझे भी चलना पड़ा।
अगर पता होता कि मैं सिर्फ ड्राइवर की हैसियत से जा रहा हूं, तो uniform पहनकर जाता!
पहला पड़ाव: पार्किंग की राजनीति
हॉल पहुंचे तो पार्किंग अटेंडेंट गायब। किसी पास के घर वाले बोले - "यहीं खड़ी कर दीजिए।"
धन्यवाद देकर गाड़ी लगाई। उस वक्त नहीं पता था कि यही सबसे VIP ट्रीटमेंट होगा जो मुझे मिलने वाला था।
थोड़ी देर में कुछ साली लोग आईं - अपनी बहन को लेने। सरिका के कहने पर मैं कुली बनकर बैग लेकर लड़की वालों के घर तक गया।
वैसे, मुफ्त की कुली सेवा भी कोई बुरी बात नहीं है!
दूसरा चैप्टर: दामादों का वर्गीकरण
घर पहुंचते ही निर्देश मिला - "बैग अंदर रखिए, बाहर हॉल में बैठिए।"
बाहर गया तो एक अद्भुत नजारा था। दो-तीन अरेंज मैरिज वाले दामाद सोफे पर बैठे थे - जैसे कोई दरबारी राजाओं के सिंहासन पर विराजमान हों।
मैंने एक कोने में कुर्सी ढूंढी और बैठ गया।
लगता है यहां भी कास्ट सिस्टम है - अरेंज मैरिज दामाद (ब्राह्मण), लव मैरिज दामाद (शूद्र)!
तीसरा अध्याय: खाने की श्रेणी
थोड़ी देर बाद एक मासूम बच्चा आया - "फूफा जी, खाना चल रहा है।"
कम से कम बच्चों में तो भेदभाव नहीं है!
खाने की जगह पहुंचा तो देखा - वही बच्चा अरेंज मैरिज दामादों को थाली में परोस रहा है, और मैं स्वयं सेवा में अपनी थाली लेकर कोने में खड़ा खा रहा हूं।
वेटर सेवा vs सेल्फ सर्विस - ये भी एक अजीब विभाजन है!
चौथा दृश्य: अदृश्यता का अनुभव
खाते समय गली से तीन साले आए। मेरे सामने से ऐसे निकले जैसे मैं हैरी पॉटर का इनविज़िबिलिटी क्लोक पहने हुए हूं।
ना देखा, ना नमस्ते।
शायद लव मैरिज करने वालों की आंखों से देखने की शक्ति चली जाती है!
आसपास फुसफुसाहट जारी थी -
"यही हैं सरिका के पति... लव मैरिज की है।" "ऐसा क्या देखा इसमें?"
मैं खामोशी से खाना खा रहा था।
जैसे कोई चिड़ियाघर में किसी नए जानवर को देख रहा हो!
पांचवां एपिसोड: सांत्वना पुरस्कार
हॉल में वापस आया तो सरिका की मौसी (दुल्हन की मां) आईं।
"बुरा मत मानना बेटा, बहुत मेहमान हैं..."
मैंने मुस्कुराकर कहा - "कोई बात नहीं आंटी, आप अपने असली मेहमानों का ध्यान रखिए।"
कम से कम माफी तो मांगी - यह भी कुछ कम नहीं!
छठा दृश्य: बेटी का प्यार vs समाज का तमाशा
इनशु (मेरी बेटी) को याद करके उस कमरे में गया जहां दुल्हन तैयार हो रही थी। इनशु मुझे देखते ही दौड़कर आई।
उसी कमरे में एक दामाद (अरेंज मैरिज कैटेगरी के) चिल्ला रहे थे -
"कोई कोल्ड ड्रिंक नहीं! वेटर सिर्फ बारातियों को देख रहे हैं! कोई इज्जत नहीं है मेरी!"
वाह! कम से कम उन्हें कोल्ड ड्रिंक की उम्मीद तो है। मैं तो पानी से ही खुश हूं!
मैं इनशु को गोद में लेकर चुपचाप कोने में बैठ गया।
सातवां अंक: फोटो का फलसफा
जयमाला का समय आया। स्टेज पर दूल्हा-दुल्हन, नीचे अरेंज मैरिज दामादों के लिए विशेष सोफे।
मैं दूर खड़ा था इनशु को गोद में लिए।
सरिका आई - "चलिए फोटो खिंचवा लेते हैं।"
स्टेज पर चढ़े तो बोली - "इनशु को किसी और को दे दो, फोटो अच्छा नहीं आएगा।"
मैंने कहा - "कोई बात नहीं, मेरी बेटी मेरे साथ रहेगी - चाहे फोटो कैसा भी आए।"
स्टेज पर खड़े होकर महसूस हुआ - जैसे कोई रेयर स्पीशीज़ को देख रहे हों।
"देखिए देखिए, लव मैरिज वाला दामाद! केवल आज ही, केवल यहीं!"
आठवां सीन: हंसी के आंसू
नीचे आया तो सरिका का मूड ऑफ हो गया।
मैंने मुस्कुराकर कहा - "कोई चिंता मत करो, हमारी फोटो कोई प्रिंट नहीं करवाएगा।"
जब सच इतना कड़वा हो तो हंसी ही बेहतर तरीका है!
बस एक अच्छी बात थी - इनशु लाइट्स में खेल रही थी और मैं उसे गोद में लिए खुश था।
कम से कम बच्चों के लिए तो सभी पापा एक समान होते हैं!
नौवां चैप्टर: आधी रात का ड्रामा
रात के 2 बजे। मैंने कहा - "अब तो चलो!"
गाड़ी निकालते समय आवाज़ आई - "जीजा ओ जीजा!"
अरे! कोई तो जीजा कहकर बुला रहा है! क्या बात है!
एक लड़का खड़ा था - "आप जिस तरफ जा रहे हो, मुझे भी छोड़ दो।"
सरिका ने बताया - "कज़िन है, छोड़ देना।"
आखिरकार कोई तो मुझसे मदद मांग रहा है!
चले तो पता चला - "मेरा गांव तो उल्टी दिशा में है, 15 किलोमीटर अंदर।"
सरिका बोली - "बेचारा है, छोड़ दो।"
रात के 3 बजे "बेचारा" बनकर 45 किलोमीटर एक्स्ट्रा ड्राइविंग!
अंतिम पड़ाव: घर वापसी
रात 3 बजे उसे छोड़ा। 30 किलोमीटर और ड्राइविंग। सुबह 4 बजे घर पहुंचा।
लगता है मैं सिर्फ एक अनपेड टैक्सी ड्राइवर था इस पूरे इवेंट में!
एपिलॉग: एक लव मैरिज दामाद की डायरी
प्रिय डायरी,
आज पता चला कि समाज में दामादों की भी कई श्रेणियां होती हैं:
प्रीमियम कैटेगरी: अरेंज मैरिज दामाद
- सोफा मिलता है
- थाली परोसी जाती है
- कोल्ड ड्रिंक की उम्मीद रख सकते हैं
इकॉनॉमी कैटेगरी: लव मैरिज दामाद
- कुर्सी ढूंढनी पड़ती है
- सेल्फ सर्विस में खाना
- अदृश्यता का विशेष अनुभव
- मुफ्त टैक्सी सर्विस बोनस में
लेकिन सबसे बड़ी बात - मेरी बेटी मुझे पापा मानती है, समाज मुझे कुछ भी माने।
और हां, प्यार करना अभी भी अपराध नहीं है - भले ही कुछ लोगों को लगता हो कि है।
अंत में...
यह कोई फिल्म नहीं थी। न ही कोई काल्पनिक कहानी।
यह एक लव मैरिज वाले दामाद की रियल स्टोरी थी। जिसने बस इतना किया था - किसी से प्यार किया और उसी से शादी की।
और शायद यही उसका सबसे बड़ा "गुनाह" था।
P.S. - अगली बार किसी शादी में जाऊंगा तो "Professional Driver" का बैज लगाकर जाऊंगा। कम से कम पेमेंट तो मिलेगी! 😊
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